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July 15, 2023July 15, 2023

मिशन चंद्रयान: भारत के अंतरिक्ष यात्रा की कहानी!

चंद्रयान मिशन -1 (2008)

भारत ने जब पहली बार चंद्रमा की सतह छूने का सपना देखा था। उस वक़्त भारत की अर्थव्यवस्था 01 ट्रिलियन डॉलर भी नहीं थी। वर्ष 1999 में Indian Academy of Sciences ने एक स्वदेशी Lunar Exploration Mission को अंजाम देने का अपना प्रस्ताव पेश किया था। उनके सुझाव पर चर्चा करते हुए Astronomical Society of India (भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद) की बैठक हुई थी। जिसमें देश भर के 100 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा भेजे गए सुझावों की समीक्षा की गयी थी। सुझाव में सम्मिलित वैज्ञानिक देश के लिए Geology, Physics, Astronomy & Planetary Science की फील्ड में बेहतरीन काम कर रहे थे।

वैज्ञानिकों के सुझाव के बाद फैसला लिया गया था। भारत चांद पर अपना अंतरिक्षयान भेजेगा। भारत सरकार ने मिशन को हरी झंडी दिखाते हुए 386 करोड़ रुपये का बजट सैंक्शन किया था।

वैज्ञानिकों द्वारा कड़ी मेहनत के बाद 22 अक्टूबर 2008 की तारीख़ को श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया था। इसकी लॉन्चिंग में PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का इस्तेमाल किया गया था। जिसका काम चंद्रयान 1 को पृथ्वी की ऑर्बिट तक पहुंचाना था। इसके आगे का सफ़र ये अपने आप करने वाला था।

चंद्रयान 1 को चांद की सतह पर पहुंचने के लिए 17 दिन का वक़्त लगा था। 8 नवंबर 2008 को भारत का अंतरिक्षयान चांद की सतह पर पहुंच गया था। इसके साथ ही भारत का नाम चुनिंदा देशों में सुमार हो गया। जिन्होंने चांद पर कदम रखा था। अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान, चीन के बाद भारत का नाम चांद की सतह छूने वाले देशों में लिया जाने लगा था।

भारत के इस प्रयास से दुनियां को चांद पर मौजूद खनिज पदार्थ की जानकारी मिली थी। चांद पर पानी होने की जानकारी भी भारत के चंद्रयान 1 के द्वारा ही दुनियां जान पाई थी।

लेकिन 1 साल अंदर ही चंद्रयान 1 में तकनीकी खामियां आने लगीं। जिसके बाद 28 अगस्त 2009 को इसरो से संपर्क टूट गया था। जिसके बाद इसरो ने मिशन ख़त्म होने की घोषणा की, 2 साल की अवधि के लिए भेजा गया चंद्रयान 10 महीने तक ही टिक पाया था। लेकिन इसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी थी। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण था चांद की सतह पर पानी का मिलना।

चंद्रयान 2.0 (2019)

इसरो द्वारा चांद की सतह पर दोबारा पहुंचने का प्रयास किया गया था। वर्ष 2008 में चंद्रयान 1 के बाद जुलाई 2019 में चंद्रयान 2 भेजा गया था। इस अभियान में इसरो ने स्वदेशी एक चंद्र ऑर्बिटर, एक रोवर एवम एक लैंडर शामिल था। इन सबका विकास इसरो द्वारा किया गया था। भारत ने चंद्रयान 2 को 22 जुलाई 2019 को श्री हरिकोटा रेंज से भारतीय समयनुसार दोपहर 2.43 बजे सफलता पूर्वक लांच किया गया था।

चंद्रयान-2 के Lander और Rover को चंद्रमा पर लगभग 70° दक्षिण के अक्षांश पर स्थित दो क्रेटरों मज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच एक उच्च मैदान पर उतरने का प्रयास करना था। पहियेदार रोवर चंद्र सतह पर चलने और जगह का रासायनिक विश्लेषण करने के लिए बनाया गया था। रोवर द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजने की योजना थी।

चंद्रयान-1 ऑर्बिटर का Moon Impact Probe (MIP) 14 नवंबर 2008 को चंद्र सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया था। Russia, USA और China की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद, चंद्रयान-2 लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग हो जाने पर भारत ऐसा करने वाला चौथा देश होता। सफल होने पर, चंद्रयान-2 सबसे दक्षिणी चंद्र लैंडिंग होता, जिसका लक्ष्य 67°-70° दक्षिण अक्षांश पर उतरना था।

हालाँकि, भारतीय समय अनुसार लगभग 1:52 बजे, लैंडर लैंडिंग से लगभग 2.1 किमी की दूरी पर अपने इच्छित पथ से भटक गया और अंतरिक्ष यान के साथ ग्राउन्ड कंट्रोल ने संचार खो दिया था।

8 सितंबर 2019 को इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ऑर्बिटर द्वारा लिए गए ऊष्माचित्र से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया है।

चंद्रयान मिशन 3.0 (2023)

चांद की सतह पर अमिट छाप छोड़ने और खोजबीन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा तैयार किया गया तीसरा चंद्र मिशन है। इसमें चंद्रयान-2 के समान एक लैंडर और एक रोवर है। लेकिन इसमें ऑर्बिटर नहीं है।

यह मिशन चंद्रयान-2 की अगली कड़ी है, क्योंकि पिछला मिशन सफलता पूर्वक चांद की कक्षा में प्रवेश करने के बाद अंतिम समय में मार्गदर्शन सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण सॉफ्ट लैंडिंग के प्रयास में विफल हो गया था, सॉफ्ट लैन्डिंग का पुनः सफल प्रयास करने हेतु इस नए चंद्र मिशन को प्रस्तावित किया गया था।

चंद्रयान-3 का लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार, श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई, 2023 शुक्रवार को भारतीय समय अनुसार दोपहर 2:35 बजे किया गया है। जिसे उम्मीदतः 23 अगस्त को चांद की सतह पर लैंड करना है। करोड़ों देश वासियों ने चंद्रयान 3 की सफलता के लिए प्रार्थना की है।

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